सेकेंडरी स्टोरेज किसे कहते हैं

सेकेंडरी स्टोरेज से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी

सेकेंडरी स्टोरेज

सेकेण्डरी स्टोरेज उपकरण का उपयोग फाइलों को सहेजने, बैकअप लेने के साथ-साथ एक स्थान या कंप्यूटर से दूसरे स्थान या अन्य कंप्यूटर में डेटा या प्रोग्राम वाली फाइलों को हस्तांतरित करने के लिए भी किया जाता है। एक समय पर, लगभग सभी फाइलों में केवल संख्याएं और अक्षर ही होते थे। इन फाइलों को सहेजने की जरूरत कम क्षमता वाले स्टोरेज उपकरणों द्वारा आसानी से पूरी हो जाती थी। डेटा स्टोरेज का काम अक्षर और संख्यात्मक फाइलों से लेकर डिजिटल म्यूजिक फाइलों, फोटोग्राफी फाइलों, वीडियो फाइलों और कई अन्य चीजों में विस्तारित हो गया है। इन नई प्रकार की फाइलों के लिए ऐसे सेकेण्डरी स्टोरेज उपकरणों की जरूरत है जिनमें बहुत अधिक क्षमता हो।

किसी भी कंप्यूटर सिस्टम में सेकेण्डरी स्टोरेज उपकरण हमेशा से एक अपरिहार्य चीज़ बने हुए हैं। वे आउटपुट और इनपुट उपकरणों के समान होते हैं। आउटपुट उपकरणों की तरह, सेकेण्डरी स्टोरेज उपकरण को भी 0 और 1 की मशीन लैंग्वेज के स्वरूप में सिस्टम यूनिट से सूचना प्राप्त होती है। हालांकि सूचना का भाषांतर करने के स्थान पर सेकेण्डरी स्टोरेज उपकरण द्वारा बाद में उपयोग के लिए मशीन लैंग्वेज में सूचना को सहेजा जाता है। इनपुट उपकरणों की तरह, सेकेण्डरी स्टोरेज उपकरण द्वारा कार्रवाई के लिए सिस्टम यूनिट में सूचना भेजी जाती है हालांकि क्योंकि सूचना पहले से ही मशीन स्वरूप में होती है इसलिए इसका भाषांतर करने की जरूरत नहीं होती है। इसे सीधे मैमोरी (RAM) में भेजा जाता है जहां इसे सीपीयू एक्सेस और प्रोसेस कर सकता है।

कंप्यूटरों को सक्षम व प्रभावी तरीके से उपयोग करने के लिए, आपको अलग-अलग प्रकार की सेकेण डरी स्टोरेज से परिचित होना चाहिए। आपके लिए हार्ड डिस्क, सॉलिड-स्टेट ड्राइव, ऑप्टिकल डिस्क, क्लाउड स्टोरेज और अन्य प्रकार की सेकेण्डरी स्टोरेज की क्षमताओं, सीमाओं और उपयोगों को जानना आवश्यक है। इसके अलावा, आपको पोर्टेबल कंप्यूटरों के स्पेश्यिलिटी स्टोरेज उपकरणों से परिचित होना चाहिए और साथ ही इस बारे में जानकारी रखनी चाहिए कि बड़े संगठन किस तरह अपने व्यापक डेटा संसाधनों का प्रबंधन करते हैं।

स्टोरेज

प्रत्येक कंप्यूटर की एक अनिवार्य विशेषता सूचना को सहेजने या भंडारित करने की क्षमता होती है। जैसा कि अध्याय 5 में चर्चा की गई, रैंडम-एक्सेस मेमोरी (RAM) यह उस डेटा व प्रोग्राम को रखती है जिसे फिलहाल सीपीयू प्रोसेस कर रहा होता है। डेटा को प्रोसेस किये जाने या प्रोग्राम के चलने से पहले, उसे RAM में होना चाहिए। इस कारण से, आरएएम को कई बार प्राइमरी स्टोरेज भी कहा जाता है।

दुर्भाग्य से, ज्यादातर RAM केवल अस्थायी या अस्थिर स्टोरेज ही प्रदान करती हैं। इसका मतलब है कि जैसे ही कंप्यूटर बंद होता है यह सारी विषय-वस्तु खत्म हो जाती है। इसकी विषय-वस्तु तब भी गायब हो जाती है जब सिस्टम यूनिट में जाने वाले इलेक्ट्रिक प्रवाह को बाधित करते हुए बिजली चली जाती है। इस अस्थिरता के फलस्वरूप डेटा व प्रोग्राम के लिए अधिक स्थायी या गैर-अस्थिर स्टोरेज की आवश्यकता होती है। हमें एक्सटर्नल स्टोरेज की भी आवश्यकता पड़ती है क्योंकि प्रयोक्ताओं को कंप्यूटर की प्राइमरी या आरएएम मैमोरी में सामान्य तौर पर उपलब्ध क्षमता की तुलना में बहुत अधिक स्टोरेज क्षमता की आवश्यकता पड़ती है।

सेकेण्डरी स्टोरेज से स्थायी या गैर-अस्थिर स्टोरेज रात होती है। सेकेण्डरी स्टोरेज उपकरण जैसे कि हार्ड- डिस्क ड्राइव का उपयोग करते हुए. डेटा व प्रोग्राम को कंप्यूटर के शट ऑफ होने के बाद भी बनाए रखा जा सकता है। यह काम सेकेण्डरी स्टोरेज उपकरण में फाइलों को राइट करके और उससे फाइलों को रीड करके पूरा किया जाता है। राइट करना सेकेण्डरी स्टोरेज उपकरण पर सूचना सहेजने की प्रक्रिया है। लोड करना सेकेण्डरी स्टोरेज से सूचना प्राप्त करने की प्रक्रिया है। इस अध्याय में सेकेण्डरी स्टोरेज उपकरण पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

सेकेण्डरी स्टोरेज की महत्वपूर्ण विशेषताएं ये हैं :-

  • मीडिया वह भौतिक वस्तु है जो डेटा व प्रोग्राम को रखती है।
  • क्षमता से यह मापा जाता है कि किसी खास स्टोरेज माध्यम में कितना डेटा का प्रोग्राम रखा जा सकता है।
  • स्टोरेज उपकरण ऐसे हार्डवेयर होते हैं जो स्टोरेज मीडिया से डेटा व प्रोग्राम को रीड करते हैं। ज्यादातर उपकरण स्टोरेज मीडिया में राइट भी करते हैं।
  • एक्सेस स्पीड से उस समय को मापा जाता है जो डेटा व प्रोग्राम को दोबारा हासिल करने के लिए स्टोरेज उपकरण को चाहिए होता है।

अधिकांश डेस्कटॉप पर्सनल कंप्यूटर सिस्टम में हार्ड डिस्क और ऑप्टिकल डिस्क ड्राइव के साथ-साथ ऐसे पोर्ट भी होते हैं जिनमें अतिरिक्त स्टोरेज उपकरणों को जोड़ा जा सकता है।

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