मैमोरी कितने प्रकार के होते हैं?

मैमोरी किसे कहते हैं?

मैमोरी, डेटा, निर्देश और सूचनाएं रखे जाने की जगह होती है। माइक्रोप्रोसेसर की तरह, मैमोरी भी चिप्स में होती है जो सिस्टम बोर्ड से जुड़ी होती हैं। तीन प्रकार की मैमोरी चिप लोकप्रिय हैं: रैंडम एक्सेस मेमोरी (रैम), रीड ओनली मेमोरी (रोम) और फ्लैश मेमोरी।

रैम (RAM)

रैंडम-एक्सेस मेमोरी (रैम) चिप्स में प्रोग्राम (निर्देशों का क्रम) और डेटा होता है जो सीपीयू उस समय प्रोसेस कर रहा होता है। आरएएम को अस्थायी या अस्थिर स्टोरेज कहा जाता है क्योंकि अधिकांश प्रकार की रैम में संचित लगभग हर चीज़, कंप्यूटर बंद करते ही मिट जाती है। बिजली जाने या कंप्यूटर को जाने वाली विद्युत धारा में कोई अन्य व्यवधान पड़ने पर भी यह मिट जाती है। सैकंडरी स्टोरेज, जिसका वर्णन हम अपने दूसरे पोस्ट में करेंगे, की सामग्री नहीं मिटती। यह स्थायी या स्थिर स्टोरेज होती है, जैसे कि किसी हार्ड डिस्क पर स्टोर किया गया डेटा। इस कारण से, जैसा कि हमने पहले बताया, अपने द्वारा किए जा रहे कार्य को नियमित रूप से दूसरी स्टोरेज डिवाइस पर स्टोर करते रहना ठीक रहता है। अर्थात् यदि आप किसी दस्तावेज या स्प्रेडशीट पर काम कर रहे हैं तो प्रत्येक कुछ मिनट बाद आपको सामग्री सेव या स्टोर कर लेनी चाहिए।

कैशे (उच्चारण “कैश”) मैमोरी, मैमोरी और सीपीयू के बीच अस्थायी उच्च-गति के होल्डिंग एरिया के रूप में काम करते हुए, प्रोसेसर को बेहतर बना देती है। कंप्यूटर पता लगाता है कि रैम में कौन सी सूचना सबसे ज्यादा बार उपयोग की जाती है और वह उस सूचना की प्रति कैशे में तैयार कर लेता है। जरूरत पड़ने पर, सीपीयू कैशे से वह सूचना तुरंत प्राप्त कर सकता है।

पर्याप्त आरएएम होना आवश्यक है। उदाहरण के लिए, माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस 2016 का मानक संस्करण उपयोग करने के लिए, आपके पास 2 जीबी, या 2 बिलियन बाइट आरएएम होनी चाहिए। कुछ एप्लीकेशन जैसे कि फोटो एडिटिंग सॉफ्टवेयर के लिए और भी अधिक की जरूरत हो सकती है। यह अच्छी बात है कि सिस्टम बोर्ड में डीआईएमएम (डुअल-ऑनलाइन-मैमोरी मॉड्यूल) नामक एक्सप्रेशन मॉड्यूल लगाकर कंप्यूटर सिस्टम में अतिरिक्त रैम जोड़ी जा सकती है। रैम की क्षमता या मात्रा बाइट्स में बताई जाती है। मेमोरी क्षमता मापने के लिए तीन यूनिट्स आमतौर से उपयोग की जाती हैं।

चाहे आपके कंप्यूटर में कोई प्रोग्राम होल्ड करने के लिए पर्याप्त आरएएम न हो, लेकिन यह वर्चुअल मेमोरी का उपयोग करके वह प्रोग्राम चला सकता है। आजकल अधिकांश ऑपरेटिंग सिस्टम वर्चुअल मेमोरी को सपोर्ट करते हैं। वर्चुअल मेमोरी के साथ, बड़े प्रोग्रामों को कई भागों में बांट दिया जाता है और वे भाग किसी दूसरी डिवाइस पर स्टोर हो जाते हैं, जो आमतौर से हार्ड डिस्क होती है। फिर प्रत्येक भाग को ज़रूरत पड़ने पर केवल आरएएम में पढ़ा जाता है। इस प्रकार कंप्यूटर सिस्टम बहुत बड़े प्रोग्रामों को चला पाते हैं।

रोम (ROM)

रीड ओनली मेमोरी (रोम) चिप्स में निर्माता द्वारा संचित की गई सूचनाएं होती हैं। रैम चिप्स के विपरीत. रोम चिप्स अस्थिर नहीं होती और उपयोक्ता द्वारा बदली नहीं जा सकतीं। “रीड ओनली” का अर्थ है कि सीपीयू रोम चिप्स पर लिखे डेटा और प्रोग्रामों को केवल पढ़ या पुनप्राप्त कर सकता है। हालांकि कंप्यूटर, रोम में मौजूद सूचना या निर्देशों को लिख-एन्कोड या परिवर्तित नहीं कर सकता।

कुछ समय पहले तक, आरओएम चिप्स आमतौर से कंप्यूटर के प्राथमिक कार्यों हेतु लगभग सभी निर्देश भरने के लिए उपयोग की जाती थीं। उदाहरण के लिए, रोम निर्देश किसी कंप्यूटर को शुरू करने मैमोरी तक पहुँचने, और कीबोर्ड इनपुट हैंडल करने के लिए आवश्यक होते हैं। हालाकि फ्लैश मैमोरी चिप ने अनेक एप्लिकेशन के लिए आरसीएम-चिप्स की जगह ले ली है।

फ्लैश मेमोरी

फ्लैश मेमोरी में आरएएम और आरओएम दोनों की विशेषताएं होती हैं। आरएएम की तरह इसे नई सूचनाएं स्टोर करने के लिए अद्यतन किया जा सकता है। आरओएम की तरह, इस पर से कंप्यूटर सिस्टम की बिजली बंद होने पर सूचनाएं नहीं मिटतीं।

फ्लैश मेमोरी का उपयोग विविध प्रकार के एप्लिकेशन के लिए किया जाता है। उदाहरण के लिए, इसका उपयोग कंप्यूटर शुरू करने से जुड़े निर्देश स्टोर करने के लिए किया जाता है।

बीआईओएस (बेसिक इनपुट/आउटपुट सिस्टम)। इस सूचना में आरएएम की मात्रा और कीबोर्ड, माउस और सिस्टम यूनिट से जुड़ी दूसरी स्टोरेज डिवाइसों से संबंधित विनिर्देश होते हैं। यदि कंप्यूटर सिस्टम में परिवर्तन किए जाते हैं तो ये परिवर्तन फ्लैश मेमोरी में दिखते हैं।

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