आउटपुट क्या होता है

आउटपुट से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी

आउटपुट

आउटपुट प्रोसेस किया हुआ डेटा या जानकारी होती है। आउटपुट आमतौर पर टेक्स्ट, ग्राफिक्स, फोटो, ऑडियो, और/या वीडियो का रूप लेता है। उदाहरण के लिए, जब आप एक प्रेजेंटेशन ग्राफिक्स प्रोग्राम का उपयोग कर कोई प्रेजेंटेशन बनाते हैं, तब आप आमतौर पर टेक्स्ट और ग्राफिक्स को इनपुट करते हैं। आप तस्वीरें, ध्वनि कथन, और यहां तक कि वीडियो भी शामिल कर सकते हैं इसका आउटपुट एक संपूर्ण प्रेजेंटेशन के रूप में होगा।

आउटपुट डिवाइस कोई भी हार्डवेयर हो सकता है जिसका आउटपुट प्रदान करने के लिए या निर्माण करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। वे जानकारी को अनुवादित करते हैं, जिस पर सिस्टम यूनिट प्रक्रिया करके उसे उस रूप में लाती है जिसे मनुष्य समझ सकता है। यहाँ आउटपुट उपकरणों की एक विस्तृत श्रृंखला मौजूद है। सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल किये जाने वाले उपकरणों में मॉनीटर, प्रिंटर और ऑडियो आउटपुट डिवाइस शामिल हैं।

मॉनीटर्स

मॉनीटर्स मीटर्स सबसे अधिक व्यापक रूप से इस्तेमाल किये जाने वाले आउटपुट डिवाइसेस होते हैं। इन्हें डिसप्ले स्क्रीन के रूप में भी जाना जाता है और ये मॉनीटर्स टेक्स्ट और ग्राफिक्स की विजुअल इमेज प्रस्तुत करते हैं। इस आउटपुट को अक्सर सॉफ्ट कॉपी के नाम से जाना जाता है। मॉनीटसं आकार, आकृति और लागत में भिन्न-भिन्न होते हैं। हालांकि लगभग सभी में कुछ न कुछ बुनियादी विभिन्न विशेषताएं होती हैं।

विशेषताएं

एक मॉनिटर की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसकी स्पष्टता होती है। यह स्पष्टता प्रदर्शित होने वाली इमेज की गुणवत्ता और तीखेपन से संदर्भित होती है। यह रेजोल्यूशन, डॉट पिच, कंट्रास्ट रेशियो, आकार और आस्पेक्ट रेश्यो सहित कई मॉनिटर विशेषताओं का एक फंक्शन होता है।

  • रिज़ोल्यूशन उसकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक है। मॉनिटर पर इमेज डॉट्स या पिक्सल (पिक्चर एलिमेंट) की एक श्रृंखला द्वारा बनती हैं। रिज़ोल्यूशन को इन डॉट्स या पिक्सल के एक मैट्रिक्स के रूप में व्यक्त किया जाता है। उदाहरण के लिए, आज के कई मॉनीटर्स में 1 920 पिक्सल के स्तंभों और 1080 पिक्सल की पंक्तियों का रिजोल्यूशन होता है, जो कुल मिलाकर 2073600 पिक्सल बनाते हैं। एक मॉनिटर का रिज़ोल्यूशन (अधिक पिक्सल) जितना अधिक होगा निर्मित हुई इमेज उतनी ही अधिक स्पष्ट होगी।
  • डॉट (पिक्सल) पिच प्रत्येक पिक्सल के बीच की दूरी को कहते हैं। ज्यादातर नए मॉनीटर्स में 0.30 मिमी (एक मिलीमीटर का 30/100 वां भाग) या उससे कम की डॉट पिच होती है। जितनी कम डॉट पिच होगी (पिक्सल के बीच जितनी कम दूरी), इमेज उतनी ही स्पष्ट होगी।
  • कंट्रास्ट रेश्यो से मॉनिटर द्वारा इमेज्स को प्रदर्शित करने की क्षमता का संकेत मिलता है। यह चमकदार सफेद से लेकर सर्वाधिक काले के क्रम में प्रकाश की तीव्रता की तुलना करता है। ये रेश्यो जितना उच्च होगा, मॉनीटर उतना बेहतर होगा। अच्छे मॉनिटर में आमतौर पर 5001 और 2000:1 के बीच कंट्रास्ट रेशियो होता है।
  • आकार, या सक्रिय प्रदर्शन क्षेत्र को मॉनिटर के कार्य क्षेत्र के विकर्ण लंबाई से मापा जाता है। सामान्य आकार 15, 17, 19, 21 और 24 इंच होते हैं।
  • आस्पेक्ट रेश्यो मॉनिटर के प्रदर्शन की चौड़ाई और ऊंचाई के बीच आनुपातिक संबंध को दर्शाता है। आमतौर पर, इस रिश्ते को एक कॉलन (:) द्वारा विभक्त की गई दो संख्याओं से व्यक्त किया जाता है। कई पुराने वर्गाकार मॉनीटरों का 4:3 का आस्पेक्ट रेश्यो होता है लगभग सभी नए मॉनीटरों में 16:9 का आस्पेक्ट रेश्यो होता है, जिन्हें चौड़ी स्क्रीन सामग्री प्रदर्शित करने के लिए तैयार किया गया है।

मॉनिटर की एक अन्य महत्वपूर्ण विशेषता स्पर्श या इशारे से इनपुट स्वीकार करने की इसकी क्षमता का होना है, जैसे स्वाइप, स्लाइड और पंचांग सहित अंगुली के चलन। जहां अधिकांश पुराने मॉनीटर स्पर्श इनपुट स्वीकार नहीं करते, वहीं यह नए मॉनिटर की एक मानक विशेषता बन रही है।

अगर आप आउटपुट से संबंधित वीडियो देखना चाहते हैं तो आप हमारे यूट्यूब चैनल पर जाकर आउटपुट से संबंधित वीडियो देख सकते हैं जिसमें विस्तार से समझाया गया है। हमारे यूट्यूब चैनल का लिंक नीचे दिया गया है।

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